

🚨🚨🚨 MEGA BIG NEWS | “प्रीपेड मीटर बना मुसीबत का मीटर!—सहारनपुर में व्यापारियों का फूटा गुस्सा, मुख्य अभियंता को सौंपा ज्ञापन, पोस्टपेड व्यवस्था बहाल करने की मांग” 🚨🚨🚨
सहारनपुर। जनपद में प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश (पंजीकृत) के पदाधिकारियों ने प्रीपेड मीटर व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री के नाम मुख्य अभियंता को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की गंभीर समस्याओं को उठाते हुए स्पष्ट कहा गया कि वर्तमान प्रीपेड मीटर व्यवस्था लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी का कारण बन चुकी है।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद से उपभोक्ताओं को कई तकनीकी और आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रीपेड मीटर के ऐप में जमा धनराशि और वास्तविक बैलेंस की सही जानकारी नहीं मिलती। कई बार उपभोक्ता पैसा जमा करने के बावजूद भी बिजली सप्लाई अचानक बंद हो जाती है। सप्लाई दोबारा चालू कराने के लिए उपभोक्ताओं को पुराने बकाये के साथ-साथ अग्रिम भुगतान भी करना पड़ता है, जो हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता।
व्यापारियों का कहना है कि भुगतान करने के बावजूद भी बिजली सप्लाई तुरंत बहाल नहीं होती, बल्कि 8 से 10 घंटे तक का लंबा इंतजार करना पड़ता है। इससे व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होती हैं और छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रीपेड मीटर का सर्वर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण भुगतान अपडेट नहीं होता और उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि उपभोक्ताओं की पुरानी सिक्योरिटी एडजस्टमेंट की जानकारी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
व्यापारियों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस आधार के वर्षों पुराने बकाये दिखाकर रिकवरी नोटिस भेजे जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। इसके अलावा कनेक्शन पीडी (परमानेंट डिस्कनेक्शन) कराने के बाद फाइनल बिल बनाने में भी अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आई हैं।
एक और बड़ी समस्या यह बताई गई कि प्रीपेड मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर अपडेट नहीं किए जाते, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की सूचना समय पर नहीं मिल पाती। वहीं, बड़ी संख्या में सीलिंग सर्टिफिकेट भी पोर्टल पर अपडेट नहीं हैं, जिससे उपभोक्ता तकनीकी रूप से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
व्यापार मंडल ने इन समस्याओं के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त की जाए और इसे केवल उपभोक्ता की सहमति पर ही लगाया जाए। साथ ही, मीटर लगाते समय उसका पूरा संचालन मैन्युअल उपभोक्ता को दिया जाए, ताकि वह सिस्टम को सही तरीके से समझ सके।
इसके अलावा, प्रीपेड मीटर पर कम से कम 5 साल की गारंटी देने और उसका गारंटी कार्ड उपभोक्ता को उपलब्ध कराने की मांग की गई है। मीटर लगाने के समय ही उपभोक्ता के मोबाइल में संबंधित ऐप डाउनलोड कराया जाए और सीलिंग सर्टिफिकेट मौके पर ही देकर पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
व्यापारियों ने यह भी मांग की है कि प्रीपेड मीटर की जांच के लिए एक स्वतंत्र लैब स्थापित की जाए, जहां उपभोक्ता अपने मीटर की सटीक जांच करा सकें। यदि मीटर तेज चलता पाया जाता है, तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर बिल में सुधार किया जाए।
नए बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाने की मांग उठाई गई है। व्यापारियों का कहना है कि एस्टीमेट के नाम पर भारी अनियमितताएं हो रही हैं और उपभोक्ताओं को बार-बार कार्यालय बुलाया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए तथा आवश्यक होने पर ही उपभोक्ता को उच्च अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
पुराने पीडी कनेक्शन की रिकवरी को लेकर भी व्यापारियों ने सख्त आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त जांच और आधार के आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी नहीं की जानी चाहिए। साथ ही, विद्युत अधिनियम के तहत नोटिस देकर उपभोक्ता को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए।
व्यापारियों की सबसे अहम मांग यह भी है कि प्रीपेड मीटर पोर्टल को इतना सक्षम बनाया जाए कि भुगतान करते ही तुरंत बैलेंस अपडेट हो और अधिकतम 5 मिनट के भीतर कटी हुई बिजली सप्लाई बहाल हो सके। इसके अलावा, उपभोक्ताओं की सिक्योरिटी राशि का पूरा अकाउंट स्टेटमेंट बनाकर उन्हें उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।
इस पूरे मुद्दे पर व्यापारियों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है—क्या व्यापारियों की मांगों को स्वीकार कर प्रीपेड मीटर व्यवस्था में सुधार किया जाएगा या फिर यह असंतोष और बढ़ेगा। फिलहाल, सहारनपुर में “प्रीपेड मीटर बनाम उपभोक्ता” की यह लड़ाई एक बड़े जन आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है।
✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
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